समुद्र वह है-हे मेरी तुम -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

समुद्र वह है-हे मेरी तुम -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

 

समुद्र वह है
जिसका धैर्य छूट गया है
दिककाल में रहे-रहे !

समुद्र वह है
जिसका मौन टूट गया है,
चोट पर चोट सहे-सहे !

 

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