समर्पण-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

समर्पण-छोटा सा आकाश-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

जब से तुम्हे देखा था
ईश्वर से केवल तुम्हे माँगा था
दिन-रात मन में विश्वास जगा
तुम्हे पाने क्या कुछ नहीं लांघा था

किस सोच में डूबी हो
बह न जाये आँखों से ये श्रृंगार
हम साथ हैं तो क्या बात है
तुम्हे ही समर्पित है यह सारा प्यार

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