समकक्ष-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

समकक्ष-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

कठिन है
अँधेरे को
आत्मा से
अलग करना

क्योंकि
दोनों कि आँख
आख़िर
उजाले
पर है!

 

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