सभ किछु जीवत को बिवहार- शब्द-रागु देवगंधारी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

सभ किछु जीवत को बिवहार- शब्द-रागु देवगंधारी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

सभ किछु जीवत को बिवहार ॥
मात पिता भाई सुत बंधप अरु फुनि ग्रिह की नारि ॥1॥रहाउ॥
तन ते प्रान होत जब निआरे टेरत प्रेति पुकारि ॥
आध घरी कोऊ नहि राखै घर ते देत निकारि ॥1॥
म्रिग त्रिसना जिउ जग रचना यह देखहु रिदै बिचारि ॥
कहु नानक भजु रामनाम नित जा ते होत उधारु ॥2॥2॥536॥

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