सभी तो लड़ते हैं-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

सभी तो लड़ते हैं-खुली आँखें खुले डैने -केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

 

सभी तो
लड़ते हैं
लड़ाइयाँ
अस्तित्व की
व्यक्तित्व की
अभिव्यक्ति की
इससे
उससे
हमसे
तुमसे
शब्द
और अशब्द से
अर्थ और अनर्थ से
तुरीय
और सुषुप्ति से
आदमी होने के लिए
अमर्त्य
जीने के लिए।

रचनाकाल: २७-०१-१९८०

 

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