सब्र हर बार इख़्तियार किया-ग़ज़ल-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

सब्र हर बार इख़्तियार किया-ग़ज़ल-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

सब्र हर बार इख़्तियार किया
हम से होता नहीं हज़ार किया

आदतन तुम ने कर दिए वा’दे
आदतन हम ने ए’तिबार किया

हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया

फिर न माँगेंगे ज़िंदगी या-रब
ये गुनह हम ने एक बार किया

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