सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि ॥
सेई पूरे साह वखतै उपरि लड़ि मुए ॥
दूजै बहुते राह मन कीआ मती खिंडीआ ॥
बहुतु पए असगाह गोते खाहि न निकलहि ॥
तीजै मुही गिराह भुख तिखा दुइ भउकीआ ॥
खाधा होइ सुआह भी खाणे सिउ दोसती ॥
चउथै आई ऊंघ अखी मीटि पवारि गइआ ॥
भी उठि रचिओनु वादु सै वर्हिआ की पिड़ बधी ॥
सभे वेला वखत सभि जे अठी भउ होइ ॥
नानक साहिबु मनि वसै सचा नावणु होइ ॥१॥(145)॥

Leave a Reply