सबाइ बलतो ओके सन्त महाराज (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun 

सबाइ बलतो ओके सन्त महाराज (देवनागरी रूप)-मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

आमाके बॉरन कोरलो
रुद्राक्षेर सेइ मिहिदाना वाला माला-
अपव्यवहार कोरो ना आमार
ओरा होए छे अकालेइ काल कवलित
आमार अपव्यवहार कोरे छिलो
तोमार ओ यदि वांछित हये
कखनो अपमृत्य
शुधु तखनइ दुरुपयोग कोरबे आमार
कि तुमि ब्रह्मराक्षस हते चाओ
ता जदि ताइ हए तोमार साध
पूर्ण हबे मनोरथ
आस्त बड़ो ब्रह्मराक्षस हते पारबे तुमि
दुषित चित्त निए जदि
अपवित्र कर पल्‍लवे स्पर्श कोरो आमार

ओ एके बारेइ योगेश्वर सेजे छिलो
सबाइ बलतो ओके सन्त महाराज

राजधानिर विमान बदरे
धरा पड़ले
सारा दिन ओके थाकते होलो
सिक्‍यूरिटिर आओताए….

(4.10.78)

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