सफ़रनामा-दस्ते-तहे-संग -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

सफ़रनामा-दस्ते-तहे-संग -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

पेकिंग

यूं गुमां होता है बाजू हैं मिरे साठ करोड़
और आफ़ाक की हद तक मिरे तन की हद है
दिल मिरा कोहो-दमन दशतो-चमन की हद है
मेरे कीसे मैं है रातों का सियहफ़ाम जलाल
मेरे हाथों में है सुबहों की अ’नाने-गुलगूं
मेरी आग़ोश में पलती है ख़ुदाई सारी
मेरे मकदूर में है मोजज़ए-कुन फ़यकून

सिंकियांग

अब कोई तबल बजेगा न कोई शाह सवार
सुबह दम मौत की वादी को रवाना होगा
अब कोई जंग न होगी न कभी रात गये
ख़ून की आग को अश्कों से बुझाना होगा
कोई दिल धड़केगा शब-भर न किसी आगन में
वहम मनहूस परिन्दे की तरह आयेगा
सहम, ख़ूंख़ार दरिन्दे की तरह आयेगा
अब कोई जंग न होगी मय-ओ-साग़र लाओ
ख़ूं लुटाना न कभी अश्क बहाना होगा
साकिया रक़स कोई रक़स-ए-सबा की सूरत
मुतरिबा कोई ग़ज़ल रंग-ए-हिना की सूरत

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