सपनों से भरे नैना-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

सपनों से भरे नैना-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

बगिया बगिया बालक भागे
तितली फिर भी हाथ न लागे
इस पगले को कौन बताये
ढूंढ रहा है जो तू जग में
कोई जो पाए तो मन में पाए
सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना

ऐसी डगर कोई अगर जो अपनाए
हर राह के वो अंत पे रास्ता ही पाए
धूप का रास्ता जो पैर जलाये
मोड़ तो आये छांव न आये
राही जो चलता है चलता ही जाए
कोई नहीं है जो कहीं उसे समझाए
सपनों से भरे…

दूर ही से सागर जिसे हर कोई माने
पानी है वो या रेत है यह कौन जाने
जैसे के दिन से रैन अलग है
सुख है अलग और चैन अलग है
पर जो यह देखे वो नैना अलग है
चैन है तो अपना सुख है पराये
सपनों से भरे…
लक बाई चांस

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