सपना ज़िंदा है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

सपना ज़िंदा है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

धरती और आकाश का रिश्ता
जुड़ा हुआ है
इसीलिए चिड़िया उड़ती है
इसीलिए नदिया बहती है
इसीलिए है
चाय की प्याली में
कड़वाहट
इसीलिए तो
चेहरा बनती है हर आहट
धरती और आकाश का रिश्ता
जुड़ा हुआ है
इसीलिए तो
कहीं – कहीं से कुछ अच्छा है
कुछ खोटा है
कुछ सच्चा है
सामनेवाली खिड़की
जूड़ा बांध रही है
धीमे – धीमे
सोया रस्ता जाग रहा है
उछल रही है तंग गली में
गेंद रबड़ की
उसके पीछे – पीछे
बच्चा भाग रहा है
रात और दिन के बीच
कहीं सपना ज़िंदा है
मरी नहीं है
जब तक ये दुनिया ज़िंदा है
धरती और आकाश का रिश्ता जुड़ा हुआ है

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