सपना-क्योंकि मैं उसे जानता हूँ अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

सपना-क्योंकि मैं उसे जानता हूँ अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

जागता हूँ
तो जानता हूँ
कि मेरे पास एक सपना है:
सोता हूँ
तो नींद में
वही एक सपना
कभी नहीं आता।
तुम्हें
मैं किसी तरह छोड़ नहीं सकता:
यों अपने से
मुक्ति नहीं पाता।

ग्वालियर, 16 अगस्त, 1968

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