सदाबहार शायरी-यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Sada Bahar Shayari Part 2

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सदाबहार शायरी-यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Sada Bahar Shayari Part 2

जब मेरा मेरे दिल का क़त्ल किया जाये

जब मेरा मेरे दिल का क़त्ल किया जाये
रहम किया जाये आख़िरी ख़्वाहिश को भी पूछ लिया जाये

ख़ुदा की कुदरत का एक क़ायदा समझा,

ख़ुदा की कुदरत का एक क़ायदा समझा,
हमने इश्क़ में नुक़सान को भी फ़ायदा समझा

मैं सारे ग़म भुलाकर हाल – ए – दिल कहता हूँ,

मैं सारे ग़म भुलाकर हाल – ए – दिल कहता हूँ,
ज़माना कहता है कि मैंने पी रख़ी है

आज उनकी ज़ुल्फ़ों से हवा ली है,

आज उनकी ज़ुल्फ़ों से हवा ली है,
इसी ख़ुशी में मरने की क़सम ख़ा ली है

जिस्म जमीं के नीचे और अरमाँ और कहीं हैं,

जिस्म जमीं के नीचे और अरमाँ और कहीं हैं,
वो मरने का शौक़ पाल रहे हैं जो ज़िन्दा ही नहीं हैं

उनसे हमें बेहद ख़तरा है जान,

उनसे हमें बेहद ख़तरा है जान,
जो दिल चुराने के बाद नज़रें चुराते हैं

हसीनाओं को कर हलाल दूँगा,

हसीनाओं को कर हलाल दूँगा,
मैं सबको अपनी आदत डाल दूँगा

ख़ुदा के हुक़्म में सदाक़त है,

ख़ुदा के हुक़्म में सदाक़त है,
ये जो मौत आलम गूँज रहा है
संभलकर निकलियेगा बाहर,
यही ख़तरा हमें भी ढूंढ रहा है

अब जीतकर हार से हारा कैसे जाये,

अब जीतकर हार से हारा कैसे जाये,
जो चीज़ ज़िन्दा ही नहीं उसे मारा कैसे जाये

चोरों की नज़र दूसरों के घरों पर ही रहती है,

चोरों की नज़र दूसरों के घरों पर ही रहती है,
पर दुनियां की नज़र तो दूसरों पर ही रहती है

सुना है वो रोज़ एक शिकार कर रहे हैं,

सुना है वो रोज़ एक शिकार कर रहे हैं,
उन्हें आज़माने का हम भी इंतज़ार कर रहे हैं,
हमने अपने कुछ अज़ीज़ों को उनके घर भेजा,
अब वो हमें ही पहचानने से इनकार कर रहे हैं

मैंने लोग पानी पे चलते देखे हैं,

मैंने लोग पानी पे चलते देखे हैं,
पेड़ के आंसू निकलते देखे हैं,
ईरान की हसीनाओं का हुस्न देख,
दिल ही नहीं पत्थर भी पिघलते देखे हैं,
मैंने नामुमकिन तब्दीलियों को देखा है,
रेगिस्ताऩ समंदर में बदलते देखे हैं

छलांग लगाओ दरिया में क्या पता किनारा मिल जाये,

छलांग लगाओ दरिया में क्या पता किनारा मिल जाये,
आप भी हमारी ग़ली में आईये हो सकता कोई सहारा मिल जाये

कुछ दिनों से सोच रहा था कोई अच्छा काम करूँ,

कुछ दिनों से सोच रहा था कोई अच्छा काम करूँ,
सोचा आज आपसे मिलता ही चलूँ

उनकी ज़ुबां पे मेरा नाम इस कदर रहता है,

उनकी ज़ुबां पे मेरा नाम इस कदर रहता है,
जैसे झूठ बन गया हूँ मैं उनके लिए,
उससे मिलने की यूँ ज़िद न कर,
कभी वक़्त ने वक़्त निकाला है किसी के लिए

आप इश्क़ में लुट जाने की परवाह करते हैं,

आप इश्क़ में लुट जाने की परवाह करते हैं,
दीवाने तो इसमें मर जाने की इल्तिज़ा करते हैं,
आपकी तबियत तो अच्छी भली है,
वरना लोग तो मरने की दुआ करते हैं

सुबह उठते ही हमारी आँखें नम होती हैं,

सुबह उठते ही हमारी आँखें नम होती हैं,
ऐसा लगता है जैसे ख़्वाहिशें ख़त्म होती हैं,
बड़ा दर्द होता जब ऐसे ख़्वाब देखती हैं,
जिसके पूरा होने की उम्मीदें बहुत कम होती हैं

शराब की एक नदी बनाओ,

शराब की एक नदी बनाओ,
क़ाग़ज़ की कश्तियाँ चलाओ,
पता जब चले ख़ेल ख़त्म है,
आग लगाओ और मर जाओ

वो जब अपने ख़ून से ख़त लिख़ते हैं,

वो जब अपने ख़ून से ख़त लिख़ते हैं,
मेरी नाराज़गी को भी मोहब्बत लिखते हैं,
मैं गुस्से में ख़त को जला देता हूँ,
इस गुस्ताख़ी को वो ख़त में इबादत लिख़ते हैं

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