सत्यमेव जयते-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

सत्यमेव जयते-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

सोम सरीखा नीर नदियों का, उत्कृष्टओं में उत्कृष्ट सकल,
छह ऋतुओं भौतिकता से धनी, प्रेम बहे प्रतिक्षण अविरल,
समावेश विविधताओं का, इतिहासों का भीषण नाद यह,
वर्तमान का प्रतिनिधित्वकर्ता, तत्समता का यह पूजास्थल,

लोकतांत्रिक गणतांत्रिक, यहाँ हर धर्म भाषा को समता,
प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी, न्याय को मिलती प्राथमिकता,
स्वतंत्रता सुनिश्चित जन-जन को, प्रतिष्ठा अवसर में समान,
अधिकार है कर्तव्य भी, नैतिक संविधान की सृजनात्मकता,

कुंदन सी युवाशक्ति यहाँ, जिसे हर क्षेत्र ने अद्भुत जाना है,
मेरे भारत की प्रतिभाओं का, सकल विश्व ने लोहा माना है,
शौर्य की यह पराकाष्ठा, संस्कृति संस्कार हैं करते विस्मित,
स्मरणीय रत्न दिए वसुधा को, सोन चिरैया हमें पहचाना है,

इतिहासों के रचयिता हम, हम साहित्य का प्रथम कदम,
मनुस्मृति उपनिषद पुराण गीता, स्वयं देववाणी सार सम,
धर्म अर्थ काम और मोक्ष, जीवन का लघुतम सारांश कहते,
हम कहे अतिथि देवो भवः, वाद हमारा वसुद्धेव कुटुंबकम,

संलग्न सदा सत्य पथ पर, यह अवनि देवभूमि कहाई,
कृष्ण राम की जन्मभूमि, रही अहिल्या राधा सीता माई,
सप्तऋषियों की पावन धरती, यही मनु क्षतरूपा पधारे,
सृष्टि का आरम्भ इति यहीं, ब्रह्माविष्णुमहेश में यह समायी,

गोराबदल राणाप्रताप, यहाँ चम्बल का वृतान्त अमर है,
त्याग है पन्नाधाय हाड़ीरानी सा, गूँजता पद्मिनी का जौहर है,
अशोक का शांतिसन्देश, यह बुद्ध महावीर की भूमि,
चंद्रगुप्त कृष्णदेवराय से नृप,रामा कौटिल्य विद्वान प्रखर है,

सूर तुलसी कबीर नानक, देव रसखान से गूंजे अम्बर,
रहीम मीरा रविदास बिहारीलाल, रचनाएँ सुंदर अविरल,
वेदव्यास और वाल्मीकि, साहित्य के दीप्तिमान नक्षत्र,
दिनकर की रचनाओं में प्रस्तुत, शब्द जाते स्वयं निखर,

स्वतंत्रता संग्राम लड़े, उन युवा बलिदानों को प्रणाम,
हर विषय के विख्यात सुर, कृतज्ञ उनके हम हर याम,
जो संसाधन बने, बने गौरव उनको प्रतिक्षण नमन,
प्रणिपात हर उस व्यक्ति को, जो सेवा करते निष्काम,

हर कण में ईश्वर का वास, मानवता नैतिकता आदर प्रधान,
क्षमा दया करुणा कुंदन है, यही कहता यहाँ का विधान,
कर्तव्यनिष्ठ अनुरागपूर्ण यह, वर्णनातीत है अपना आर्यावर्त,
विश्वगुरु गौरव धरती का, सत्यमेव जयते मेरा भारत महान!!

 

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