सत्यभामा-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-मादा कविताएँ-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

सत्यभामा-सुदामा पाण्डे का प्रजातंत्र-मादा कविताएँ-सुदामा पांडेय धूमिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sudama Panday Dhoomil

सूर्योदय :

घोड़े के टाप के नीचे
नींद का कुचला हुआ चेहरा है
और मुँह के फीके स्वाद में
एक सपना तैर रहा है ।

अपने दाँतों के नीचे से खींचकर निकालता हूँ
रात की नंगी देह
जहाँ ख़बर होने से पहले ही
शहर ख़त्म हो चुका है । उबासियों में ऊंघते
तुम्हारे नितम्ब
फून की तरह, युवा नज़रों के इशारे पर
टंकित करते हैं ।

“हलो हलो” करते हुए ।
देह के अंधेरे में
नीली नस नाड़ियों वाला,

उत्तेजित चमड़ा चिल्लाता है
और मेरी जांघें, भाषा के खिलाफ़–
शहर-कानून का उल्लंघन करती हैं ।

खिड़की से कुछ पूछता है पेड़
और लड़की से कुछ
युवा लड़का पूछता है
क्या दोनों एक ही सवाल
पूछते हैं ?

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