सती पापु करि सतु कमाहि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सती पापु करि सतु कमाहि-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

सती पापु करि सतु कमाहि ॥
गुर दीखिआ घरि देवण जाहि ॥
इसतरी पुरखै खटिऐ भाउ ॥
भावै आवउ भावै जाउ ॥
सासतु बेदु न मानै कोइ ॥
आपो आपै पूजा होइ ॥
काजी होइ कै बहै निआइ ॥
फेरे तसबी करे खुदाइ ॥
वढी लै कै हकु गवाए ॥
जे को पुछै ता पड़ि सुणाए ॥
तुरक मंत्रु कनि रिदै समाहि ॥
लोक मुहावहि चाड़ी खाहि ॥
चउका दे कै सुचा होइ ॥
ऐसा हिंदू वेखहु कोइ ॥
जोगी गिरही जटा बिभूत ॥
आगै पाछै रोवहि पूत ॥
जोगु न पाइआ जुगति गवाई ॥
कितु कारणि सिरि छाई पाई ॥
नानक कलि का एहु परवाणु ॥
आपे आखणु आपे जाणु ॥१॥(951)॥

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