सतिगुर नानक प्रगट्या मिटी धुंध जग चानन होआ ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

सतिगुर नानक प्रगट्या मिटी धुंध जग चानन होआ ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सतिगुर नानक प्रगट्या मिटी धुंध जग चानन होआ ॥
ज्युं कर सूरज निकल्या तारे छपे अंधेर पलोआ ॥
सिंघ बुके मिरगावली भन्नी जाए न धीर धरोआ ॥
जिथै बाबा पैर धरै पूजा आसन थापन सोआ ॥
सिध आसन सभ जगत दे नानक आद मते जे कोआ ॥
घर घर अन्दर धरमसाल होवै कीरतन सदा विसोआ ॥
बाबे तारे चार चक नौ खंड प्रिथमी सचा ढोआ ॥
गुरमुख कलि विच परगट होआ ॥28॥

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