सतिगुरु पुरखु अगमु है-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

सतिगुरु पुरखु अगमु है-श्लोक -गुरू राम दास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Ram Das Ji

सतिगुरु पुरखु अगमु है जिसु अंदरि हरि उरि धारिआ ॥
सतिगुरू नो अपड़ि कोइ न सकई जिसु वलि सिरजणहारिआ ॥
सतिगुरू का खड़गु संजोउ हरि भगति है जितु कालु कंटकु मारि विडारिआ ॥
सतिगुरू का रखणहारा हरि आपि है सतिगुरू कै पिछै हरि सभि उबारिआ ॥
जो मंदा चितवै पूरे सतिगुरू का सो आपि उपावणहारै मारिआ ॥
एह गल होवै हरि दरगह सचे की जन नानक अगमु वीचारिआ ॥2॥312॥

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