सजल-सजल निज नील नयन-घन-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

सजल-सजल निज नील नयन-घन-लहर पुकारे -गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

सजल सजल निज नील नयन-घन!

उन्मन मन-मधुकर मुधुवन, बन,
उन्मन जीवन-जन तृन, तृन, कन,
बरसो, बरसो ऐसे बरसो रुदन बने रिमझिम रिमझिम-स्वन!
सजल सजल निज नील नयन-घन!

यह मत देखो मैं घुलता हूँ,
यह मत देखो मैं ढलता हूँ,
देखो सूनी गोद प्रकृति की, देखो सदन सदन-सूनापन!
सजल सजल निज नील नयन-घन!

भूलो मेरी विह्वलता को,
भूलो मेरी दुर्बलता को
पर बन जाओ स्वाति बूँद चिर तृषित चातकी के जीवन-धन!
सजल सजल निज नील नयन-घन!

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