सच-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

सच-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

 

सच सब जगह बिकता है
लेकिन बिकने के बाद वह झूठ हो जाता है

झूठ कहीं नहीं बिकता है
लेकिन बिकने के बाद सच हो जाता है

सच हर कोई बेचना चाहता है
लेकिन बेंच नहीं पाता

झूठ कोई नहीं बेचना चाहता है
फिर भी ख़रीदार मिल जाता है

 

Leave a Reply