सकल सुगंधता मिलत अरगजा होत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सकल सुगंधता मिलत अरगजा होत-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

सकल सुगंधता मिलत अरगजा होत
केटि अरगजा मिलि बिसम सुबास कै।
सकल अनूप रूप कमल बिखै समात
हेरत हिरात कोटि कमला प्रगास कै ।
सरब निधान मिलि परम निधान भए
कोटिक निधान हुइ चकित बिलास कै ।
चरन कमल गुर महमा अगाधि बोधि
गुरसिख मधुकर अनभै अभ्यास कै ॥६६॥

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