सकल बन फूल रही सरसों- अमीर खुसरो -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Amir Khusro ,

सकल बन फूल रही सरसों- अमीर खुसरो -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Amir Khusro ,

सकल बन फूल रही सरसों।
बन बिन फूल रही सरसों।
अम्बवा फूटे, टेसू फूले,
कोयल बोले डार-डार,
और गोरी करत सिंगार,
मलनियाँ गेंदवा ले आईं कर सों,
सकल बन फूल रही सरसों।
तरह तरह के फूल खिलाए,
ले गेंदवा हाथन में आए।
निजामुदीन के दरवज़्ज़े पर,
आवन कह गए आशिक रंग,
और बीत गए बरसों।
सकल बन फूल रही सरसों।

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