संघर्ष-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

संघर्ष-प्रहरी : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

संघर्ष हमारे जीवन का
एकमात्र सबल आधार प्रिय,
चलता जीवन प्रतिपल इससे
नर या फिर अवतार प्रिय।

दुर्गम पथ दे बल असीम
दुर्बलता पर जय पाने को,
जीवन-धारा करती कल-कल
बह उठती लहराने को।

समर बना लघु जीवन तो
मधुरस की बहती है धारा,
किटकिट जिस क्षण रुकती
जीवन हो जाता सूखा – हारा।

संघर्ष नहीं कर सकता तो
जा मंदिर की बन जा मूरत,
पुष्प चढ़ेंगे तन पर तेरे
चमकेगी तेरी सूरत।

संघर्ष रुका, तो जीवन भी,
सूखी रस की बरसात प्रिय,
जीवन सरस बनाने को
संघर्ष मिला सौगात प्रिय।

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