संग हमारे चलने का तू वादा कर।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

संग हमारे चलने का तू वादा कर।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

काँटे चुन दामन में
मृदु – रस मैं भर दूँ,
हरित, सान्द्र उपवन-सा
सुरभित मन कर दूँ।
जहाँ मधुप गुनगुन की तान सुनाता है
और पुष्प -दल को हर्षित सहलाता है,
तू धरती का नूर, निरखते अपलक नभचर
संग हमारे चलने का तू वादा कर।

कर दूँ पथ आच्छादित
कोमल पंखुड़ियों से,
पग- पग करूँ सँवार
मुदित, नव -वल्लरियों से।
जहाँ कोकिला मधुमय कूक सजाती है
डाली- डाली फुदक सुधा बरसाती है,
अपने अंचल की छाया दे – दे मेरे सर
संग हमारे चलने का तू वादा कर।

तू मेरी सांसों की माला
का सुवास है,
मेरे प्राणों की तू
अनबुझ दिव्य प्यास है।
मेरा मन – चातक प्यासा रह जाता है
तेरा जब लावण्य जलद बन छाता है,
मेरे दग्ध ह्रदय की तपन अरी तू हर
संग हमारे चलने का तू वादा कर।

 

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