संगाती-शरीर कविता फसलें और फूल-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

संगाती-शरीर कविता फसलें और फूल-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

नहीं
रामचरण नहीं था
न मदन था न रामस्वरूप

कोई और था
उस दिन
मेरे साथ

जिसने
सतपुड़ा के जंगलों में
भूख की शिकायत की न प्यास की

जिसने न छाँह ताकी
न पूछा कितना बाक़ी है अभी
ठहरने का ठिकाना और

 

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