श्लोक -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 29

श्लोक -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 29

 बारि विडानड़ै हुमस धुमस

बारि विडानड़ै हुमस धुमस कूका पईआ राही ॥
तउ सह सेती लगड़ी डोरी नानक अनद सेती बनु गाही ॥1॥520॥

सची बैसक तिन्हा संगि

सची बैसक तिन्हा संगि जिन संगि जपीऐ नाउ ॥
तिन्ह संगि संगु न कीचई नानक जिना आपणा सुआउ ॥2॥520॥

विछोहे ज्मबूर खवे

विछोहे ज्मबूर खवे न वंञनि गाखड़े ॥
जे सो धणी मिलंनि नानक सुख स्मबूह सचु ॥1॥520॥

जिमी वसंदी पाणीऐ

जिमी वसंदी पाणीऐ ईधणु रखै भाहि ॥
नानक सो सहु आहि जा कै आढलि हभु को ॥2॥521॥

कड़छीआ फिरंन्हि

कड़छीआ फिरंन्हि सुआउ न जाणन्हि सुञीआ ॥
सेई मुख दिसंन्हि नानक रते प्रेम रसि ॥1॥521॥

खोजी लधमु खोजु

खोजी लधमु खोजु छडीआ उजाड़ि ॥
तै सहि दिती वाड़ि नानक खेतु न छिजई ॥2॥521॥

 

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