श्लोक -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 26

श्लोक -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 26

 जीवन पदु निरबाणु

जीवन पदु निरबाणु इको सिमरीऐ ॥
दूजी नाही जाइ किनि बिधि धीरीऐ ॥
डिठा सभु संसारु सुखु न नाम बिनु ॥
तनु धनु होसी छारु जाणै कोइ जनु ॥
रंग रूप रस बादि कि करहि पराणीआ ॥
जिसु भुलाए आपि तिसु कल नही जाणीआ ॥
रंगि रते निरबाणु सचा गावही ॥
नानक सरणि दुआरि जे तुधु भावही ॥2॥321॥

धरणि सुवंनी खड़ रतन जड़ावी

धरणि सुवंनी खड़ रतन जड़ावी हरि प्रेम पुरखु मनि वुठा ॥
सभे काज सुहेलड़े थीए गुरु नानकु सतिगुरु तुठा ॥1॥322॥

 फिरदी फिरदी दह दिसा

फिरदी फिरदी दह दिसा जल परबत बनराइ ॥
जिथै डिठा मिरतको इल बहिठी आइ ॥2॥322॥

सलोक दोहा-एकु जि साजनु मै कीआ

एकु जि साजनु मै कीआ सरब कला समरथु ॥
जीउ हमारा खंनीऐ हरि मन तन संदड़ी वथु ॥1॥322॥

 जे करु गहहि पिआरड़े

जे करु गहहि पिआरड़े तुधु न छोडा मूलि ॥
हरि छोडनि से दुरजना पड़हि दोजक कै सूलि ॥2॥322॥

 

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