श्लोक -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 20

शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 20

अवखध सभे कीतिअनु

अवखध सभे कीतिअनु निंदक का दारू नाहि ॥
आपि भुलाए नानका पचि पचि जोनी पाहि ॥2॥315॥

गुर नानक हरि नामु द्रिड़ाइआ

गुर नानक हरि नामु द्रिड़ाइआ भंनण घड़ण समरथु ॥
प्रभु सदा समालहि मित्र तू दुखु सबाइआ लथु ॥1॥317॥

खुधिआवंतु न जाणई

खुधिआवंतु न जाणई लाज कुलाज कुबोलु ॥
नानकु मांगै नामु हरि करि किरपा संजोगु ॥2॥317॥

 हरि हरि नामु जो जनु जपै

हरि हरि नामु जो जनु जपै सो आइआ परवाणु ॥
तिसु जन कै बलिहारणै जिनि भजिआ प्रभु निरबाणु ॥
जनम मरन दुखु कटिआ हरि भेटिआ पुरखु सुजाणु ॥
संत संगि सागरु तरे जन नानक सचा ताणु ॥1॥318॥

 भलके उठि पराहुणा

भलके उठि पराहुणा मेरै घरि आवउ ॥
पाउ पखाला तिस के मनि तनि नित भावउ ॥
नामु सुणे नामु संग्रहै नामे लिव लावउ ॥
ग्रिहु धनु सभु पवित्रु होइ हरि के गुण गावउ ॥
हरि नाम वापारी नानका वडभागी पावउ ॥2॥318॥

Leave a Reply