श्लोक-गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 3

शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji 3

 

आपहि कीआ कराइआ

आपहि कीआ कराइआ आपहि करनै जोगु ॥
नानक एको रवि रहिआ दूसर होआ न होगु ॥1॥250॥

निरंकार आकार आपि

निरंकार आकार आपि निरगुन सरगुन एक ॥
एकहि एक बखाननो नानक एक अनेक ॥1॥250॥

सेई साह भगवंत से

सेई साह भगवंत से सचु स्मपै हरि रासि ॥
नानक सचु सुचि पाईऐ तिह संतन कै पासि ॥1॥250॥

धनु धनु कहा पुकारते

धनु धनु कहा पुकारते माइआ मोह सभ कूर ॥
नाम बिहूने नानका होत जात सभु धूर ॥1॥250॥

अनिक भेख अरु ङिआन धिआन

अनिक भेख अरु ङिआन धिआन मनहठि मिलिअउ न कोइ ॥
कहु नानक किरपा भई भगतु ङिआनी सोइ ॥1॥251॥

आवन आए स्रिसटि महि

आवन आए स्रिसटि महि बिनु बूझे पसु ढोर ॥
नानक गुरमुखि सो बुझै जा कै भाग मथोर ॥1॥251॥

आवत हुकमि बिनास हुकमि

आवत हुकमि बिनास हुकमि आगिआ भिंन न कोइ ॥
आवन जाना तिह मिटै नानक जिह मनि सोइ ॥1॥251॥

 

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