श्मशान अंत नहीं जीवन की शुरुआत है-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

श्मशान अंत नहीं जीवन की शुरुआत है-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

श्मशान की रात..
कैसी होती होगी श्मशान की रात
जहां रोज़ जल जाते होंगे ना जाने कितने ख्याब
जहां ठाठ से सब लेटकर जाते होंगे
जहां लोग मातम कम वक्त ज्यादा देखते होंगे
जहां माटी की कीमत इंसा से ज्यादा होती होगी
जहां स्वयं शिव विराजते होंगे
जहां अघोरी मानुज का भोग लगाते होंगे
जहां प्रेत-पिशाच नित्य शिव आरती करते होंगे
हां तो कैसी होती होगी वो श्मशान वाली रातें
श्मशान की रातों में शोर नहीं शान्ति होगी
आहट रूहों की बस थोड़ी आती होगी
अघोरी उपासना करते होंगे
जहां शिव भस्म की होली खेलते होंगे
रूहें नई नवेली आत्माओं का अभिनन्दन करती होगी
आपस मे मिलकर शायद वो कुछ संवाद करती होगी
त्याग कर इस मायावी दुनियां को
वो सब अब अमरत्व की ओर बढ़ती होगी
हर रात वहां दरबार सजता होगा
मोह-माया का ये बन्धन सचमुच अब खत्म होता होगा
एक नए मार्ग की तरफ सब जाते होंगे
जीवन-मरण के इस खेल से अब वो मुक्ति पाते होंगे
हर रात वहां सत्य से सबका सामना होता होगा
शायद इस कारण ही शख़्स श्मशान जाने से डरता होगा..!!

 

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