शेर -बिस्मिल अज़ीमाबादी-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bismil Azimabadi 1

शेर -बिस्मिल अज़ीमाबादी-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bismil Azimabadi 1

अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू-ए-शौक़
दम घुट रहा है वक़्त की रफ़्तार देख कर

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‘बिस्मिल’ बुतों का इश्क़ मुबारक तुम्हें मगर
इतने निडर न हो कि ख़ुदा का भी डर न हो

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दास्ताँ पूरी न होने पाई
ज़िंदगी ख़त्म हुई जाती है

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देखा न तुम ने आँख उठा कर भी एक बार
गुज़रे हज़ार बार तुम्हारी गली से हम

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एक दिन वो दिन थे रोने पे हँसा करते थे हम
एक ये दिन हैं कि अब हँसने पे रोना आए है

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ग़ैरों ने ग़ैर जान के हम को उठा दिया
बैठे जहाँ भी साया-ए-दीवार देख कर

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हँसी ‘बिस्मिल’ की हालत पर किसी को
कभी आती थी अब आती नहीं है

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हो न मायूस ख़ुदा से ‘बिस्मिल’
ये बुरे दिन भी गुज़र जाएँगे

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उगल न संग-ए-मलामत ख़ुदा से डर नासेह
मिलेगा क्या तुझे शीशों के टूट जाने से

वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है

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ये कह के देती जाती है तस्कीं शब-ए-फ़िराक़
वो कौन सी है रात कि जिस की सहर न हो

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ये ज़िंदगी भी कोई ज़िंदगी हुई ‘बिस्मिल’
न रो सके न कभी हँस सके ठिकाने से

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