शूद्र-भारत-भारती (वर्तमान खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Vartman Khand) 

शूद्र-भारत-भारती (वर्तमान खण्ड) -मैथिलीशरण गुप्त -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Maithilisharan Gupt Bharat-Bharti( Vartman Khand)

 

शूद्र

जब मुख्य-वर्ण द्विजातियों का हाल ऐसा है यहाँ,
तब क्या कहें, उस शूद्र-कुल का हाल कैसा है यहाँ ?
देखो जहाँ हा! अब भयंकर तिमिर-पूरित गर्त है,
यह दीन देश अध:पतन का बन गया आनर्त है ॥२२६॥

 

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