शायरी संग्रह-6-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh part 6 , 7

शायरी संग्रह-6-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh part 6 , 7

शायरी संग्रह-6-शायरी-दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

मुझे देखकर मंजिल भी सहम गई।

मुझे देखकर मंजिल भी सहम गई।
बोली भला इतनी शोहरत कैसे कोई पाता है ।
मैंने कहा यहां बात शोहरत की नहीं शब्दों का जादू है।
जो बसा हो हर दिल में उसे निकाल कौन पाता है।।

देशहित पर न बोलू, ऐसा गद्दार नहीं।

देशहित पर न बोलू, ऐसा गद्दार नहीं।
पहले मेरा देश है, मेरा आधार नहीं।
ऐसे लोगों को न बक्सूगा,
देशभक्त हू केवल कविराज नही।‌।

देशहित पर बात करो।

देशहित पर बात करो।
जो जैसा वैसा व्यवहार करो।
बातों से समझाना लाजिमी है,
पर ना समझे तो वार करो।।

शायरी संग्रह-7-शायरी-दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

कोई नजरों से वार करता, कोई इजहार करता है।

कोई नजरों से वार करता, कोई इजहार करता है।
कोई खामोश बैठा है, कोई दीदार करता है।।
मोहब्बत में जो डूबे, उनकी कशिश न पूछो ग़ालिब।
कोई कह के बदनाम होता, किसी को यार करता है।।

नींद भी है बेबस सी, ज़मीं भी है हैरत सी।
ख्वाब भी हैं रुठे से, सांस भी है गैरत सी।।
आंखों ने आंखों से लड़कर बतलाया है,
प्रेम भी है इबादत सी, वो भी हैं खैरियत सी।।

जब तुम वफ़ा न करते, तो इल्जाम क्यों करते हो।
सांसे लेते खुद हो, तो हिसाब क्यों करते हो।।
तुम गलियों से भी गुजरो, तो मेरा दिल धड़क जाता है।
नजरे लड़ाओ मुझसे, तो बदनाम क्यों करते हो।।

 

मुंह की भाषाओं में न पैमाना,

मुंह की भाषाओं में न पैमाना,
पैमाने छलकाते नेताजी।
जो वादा कर देते,
उस पर टिक न पाते नेताजी।।

जो रंग बदले झूठा है गिरगिट,
दिन भर भौके नेताजी।
कड़ी धूप गांवो में कीचड़,
थामें पैजामा कूदे नेताजी।।

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