शायरी संग्रह-2-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

शायरी संग्रह-2-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

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एक दिन का वो रूबरू,
एहसास काम कर गया।
जो देते थे तेरी सुंदरता मे मिसाल,
उन्हें गुलाम कर गया।।
वो तेरा पहली बार हंसकर मिलना,
खंजर की तरह दिल को पार कर गया ।।

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दुश्वारी न मिले तो जो,
अपने होने का हक जताते हैं।
उनकी औकात पता नहीं चलती ।

लम्हा ,मुकद्दर, मौका सबको मिलता है
बस पहचानने की सबमे नजाकत नहीं होती।।

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नींद क्यों वापस करू
मैं भी तो याद में जागता हूं।
ख्वाब छीना तो तेरे,
ख्वाब में रहता हूं।।
उम्मीद वापस करूं,
तो मेरा क्या ?
मैं भी तो तेरी,
उम्मीद में रहता हूं।।

 

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जिंदगी की थकान में,
मौत भी जरूरी है ।
क्योंकि कुछ लोगों ने तो,
अगले जन्म का वादा किया ।।

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निगाहे धड़कन जब उतरना,
तो सीधे दिल में उतरना ।

तेरा घूम फिर कर दिल में,
उतरना सख्त मना है।।

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अगर मोहब्बत होती ,
तो वह अपनी मोहब्बत बिकने न देता।
पैमाइस करता मोहब्बत मे,
उसे बदनाम होने न देता।।

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