शायरी संग्रह-1-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

शायरी संग्रह-1-शायरी -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

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वो नाव ही क्या,
जो मंझधार पार न कर दे।
वो तीर ही क्या,
जो शिकार न कर दे।।

वो काम ही क्या,
जो आसमान में तान न भर दे।
वो प्रेम ही क्या,
जो मदहोशी का गुलाम न कर दे।।

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वो ईश्वर किसी को ऊँचा
तो किसी को पहचान देता है।
किसी को नाम
तो किसी को नमामि देता है।

आजमाता है जब वह किसी को,
उसी को वो नेक काम देता है।।

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मुझसे दुश्मनी निभाकर, तुम्हें क्या मिला।
मैं दीपक मेरे तले, अंधेरा मिला।।

हमने रोशनी देनी चाही,
तो वे हमें बुझाकर बोले ।
तू जलता था तो मुस्कुराता था,
तेरी रोशनी से हमें क्या मिला।।

 

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दीन दुखी असहायो का दर्द,
कौन देखें और किसे दिखेगा।

सिर पर बोझ पीठ पर ममता,
ये दर्द हम न लिखे तो कौन लिखेगा।।

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सबकी मुरादें पूरी करना
एक मुझे छोड़कर ।

फिर भी मैं तुझे छोड़ दूं
ऐसा हो ही नहीं सकता।।

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इन आंखों में वो,
राज दफन आज भी है ।
उनसे इस कदर है दुश्मनी,
पर मोहब्बतें ऐहतराम आज भी है।

कुछ तस्बीरे आज भी,
गुजरती है आंखों से ।
उनकी भोली सूरत पे न जाना,
उनकी आंखों में दागे इल्जाम आज भी है।।

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मसरूफ रहकर हम, याद कर लेंगे।
तन्हा है तन्हाई से,फरियाद करेंगे ।।

हर रिश्ते में सब,धोखेपन की बात करते हैं ।।
यही सोचकर हम,खुद का हिसाब कर लेंगे।

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मेरा हिसाब तुम क्या लगाओगे ।
अपना लगाकर देखा है ।।
जख्म देने की बजाय
किसी का जख्म खींचा है ।

तुम्हारी झूठो की नाव है
और मैं सच की भंवर ।
किनारे ही रहना,
भवरो ने बहुत उफान देखा है।।

 

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जिसकी तुम्हें बड़ी हसरत है ।
देखना,
औरों को देते तुम पर न भारी पड़ जाए।

और इस एहसास की दरिया में,
कहीं तेरा दिल भी न उतर जाए।।

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वो तस्वीर आंखों से
गुजारने की जरूरत नहीं होती।

जिसे आंख बंद करते ही
एहसास जगाकर दिल
स्वयं को जगारने लगे।

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सबके जीने का अपना ढ़ग होता है।
किसी की बोली मे तीखापन
तो किसी की बोली में
शहद सा रंग होता है ।।

किसने जीना कब शुरु किया
इसको वो ही जाने
इस दुनिया के संघर्षों में लड़ते झगड़ते
गिरने उठने का जिसमे दम होता है।।

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अब वो आस नहीं जो
हुआ करती थी ।
मन न चाहे तो न चाहे,
पर दिल को छुआ करती थी।।

कुछ कहने से अच्छा है
खो जाना ।
जिनकी इबादत,
कभी नजरें किया करती थी।

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एक दिन मैंने उनकी,
आंखों में देखा था ।
सच्चाई महसूस,
करके पूछा था ।।

वो बोले कि हम
साथ नहीं छोड़ेंगे ।
उनका पता नहीं
आज भी वो मेरे साथ है।
जिन्होंने झूठों मे,
मुझे लूटा था।।

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जब अपने है गैर निकले
किसी पर ऐतवार क्या करना ।

दिल से है दिल का वार
उनसे आंखें लड़ाकर क्या कहना।।

तस्वीरें हैं आवाजें हैं
यही थी पहले भी
तो रोज बदलते उनके चेहरे का,
दीदार क्या करना।।

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वो नजरों में है पर,
पहचान नहीं रखते ।
दिल में रहते हैं पर,
हिसाब नहीं रखते।

जब खुलेगा ऊपरी अदालत में
हिसाब का पन्ना
तब उनकी रुह तड़प,
कर मर जाएगी ।
जो खुद इजहार करके,
अंजाम नहीं रखते।।

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जो प्यार का दावा करते थे
वो साथ क्या निभाएंगे
जो कहते है हम चाहते हैं आपको
वो यह बात क्या समझ पाएंगे

हमने चाहत कम दिखाई,
सोचा कह दे कि जी लेंगे तेरे यादों के साथ।

लेकिन जिसे रस मिला हो कई फूलो का,
वो एक डाली पर ठहर ना पाएंगे।।

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हम किसी को दर्द देते रहे
सोचा प्यार परवान चढ़ जाए ।
सालों से हमें जानते हैं
शायद कुछ दिल में उतर जाए।

हम दर्द लिए घूमते रहे उन्हें दिखाने को
और वो व्यस्त थे किसी और को बहलाने में

तब हमने समझा इतिहास
क्यों न लाल हो जाए।
काश जो पन्नों में लिखे
हकीकत में उतर जाए।।

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