शाम के नाम : अंतिम बेला-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

शाम के नाम : अंतिम बेला-प्राणेन्द्र नाथ मिश्र -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Pranendra Nath Misra

 

अब खेल खतम है मदारी का,
तुम पैसे फेंको, ना फेंको
चल पड़ा, दूसरे ठौर पे मैं
मेरी गति देखो, या न देखो।

मैं मुड़ के नहीं अब देखूंगा
जो बीत गया, वह भस्म है अब
उसको भी तिरोहित कर देना
ऐसी समाज की रस्म है जब।

 

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