शहद दियां मक्खियां-नाज़िम हिकमत रन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazim Hikmet Ran(अनुवाद : हरभजन सिंह हुन्दल) 

शहद दियां मक्खियां-नाज़िम हिकमत रन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazim Hikmet Ran(अनुवाद : हरभजन सिंह हुन्दल)

शहद दियां मक्खियां शहद दे वड्डे तुपके हन ।
उह अंगूर दियां वेलां नूं
सूरज तीक लै जांदियां ने ।
उह मेरी जवानी विचों उड्ड के बाहर निकलियां सन
इह सेब
इह भारे सेब वी
उथों ही निकले ने ।

इह सोने-रंगी धूड़ वाली सड़क
नदी विचले चिट्टे गीटे,
गीतां विच मेरा भरोसा
ईरखा-रहत मेरी हसती
निर-बद्दल दिन,
इह नीला दिन वी
उथों ही आया है ।

पिट्ठ भार प्या समुन्दर
नंगा ते निघ्घा है
इह तांघ, इह चमकीले दन्द, इह होंठ
शहद दे वड्डे तुपके हन
जेहड़े शहद दियां मक्खियां दियां
लत्तां नूं लग्ग के
इस ‘काकेशियाई’ पिंड तीक आए हन ।
इह मेरी पिच्छे रह गई जवानी
दी कमाई हन ।

(13 सतम्बर 1958)
(आरहीपो ओसी पोवदा)

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