शमसान-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

शमसान-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

मंजर मंजर तुमको गाया
फिर खुद से अंजान हुये ।
तुमको खोकर जले हैं ऐसे
तन मन सब शमशान हुये ।।

तुम बिन ये एकाकी जीवन
मौत की एक इकाई है ।
जनम जनम का बंधन है ये
या जन्मों जन्मों की खाई है ।
धड़कन सान्सें तुझको पुकारें
और हम तेरे नाम हुये ।
तुमको खोकर जले हैं ऐसे
तन मन सब शमशान हुये ।।

तेरी दुनियां बसाकर मन ये
मीरा सा बैरागी है ।
तुझमें खोकर, तुझसा होकर
मन खुद से ही बागी है ।
मिलन को हम राधा सा रोए
विरह में हम भी श्याम हुये ।
तुमको खोकर जले हैं ऐसे
तन मन सब शमशान हुये ।।

मेरे गीतों में जीवित वो
अपनी प्रेम कहानी है ।
जिसमें मैं सागर सा बेबस
और तू दरिया सी दीवानी है ।
तुम लफ्ज़ो से अमर हुई हो
और हम गाकर बदनाम हुये ।
तुमको खोकर जले हैं ऐसे
तन मन सब शमशान हुये ।।

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