शब्द राग कल्याण-संत दादू दयाल जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Dadu Dayal Ji

शब्द राग कल्याण-संत दादू दयाल जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Dadu Dayal Ji

(गायन समय संधया 6 से 9 रात्रि)

त्रिताल

मन मेरे कुछ भी चेत गँवार,
पीछे फिर पछतायेगा रे, आवे न दूजी बार।टेक।
काहे रे मन भूल्यो फिरत है, काया सोच-विचार।
जिन पंथों चलणा है तुझको, सोई पंथ सँवार।1।
आगे बाट विषम जो मन रे, जैसी खांडे की धार।
दादू दास सांई सौं सूत कर, कूड़े काम निवार।2।

2 त्रिताल

जग सौं कहा हमारा, जब देख्या नूर तुम्हारा।टेक।
परम तेज घर मेरा, सुख सागर माँहिं बसेरा।1।
झिलमिल अति आनन्दा, तहँ पाया परमानन्दा।2।
ज्योति अपार अनन्ता, खेलैं फाग वसन्ता।3।
आदि-अन्त सुस्थाना, जन दादू सो पहचाना।4।

।इति राग कल्याण सम्पूर्ण।

This Post Has One Comment

Leave a Reply