वक़्त से…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

वक़्त से…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

सबके भरने का दम भरता है मेरे भी तो कभी भर
कुछ ज़ख़्म तक़लीफ़ देते हैं अभी, उनका कुछ कर !

तेरे गुज़रने पर सुना है सब कुछ भूल जाया करता है
वो यादें, वो सदमे भी जो दिल में कर चुके हों घर !

बुरा बन कर तो बहुत राब्ता रख लिया, ऐ दोस्त…
किसी रोज़ अच्छा बन कर भी तो निकल आ इधर !

यह भी क्या ज़िद है कि चला गया तो आता नहीं…
कोई प्यार से गर बुलाये तो कभी पलट आया कर !

हर एक ग़लत बात पर लोग तेरा ही नाम लेते हैं…
बता क्यों लिये फिरता है इतने इल्ज़ाम अपने सर ?!

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