वो शुक्रवार या रविवार था-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

वो शुक्रवार या रविवार था-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

 

वो शुक्रवार था या रविवार
हवाओं ने छीन लिया था
मुँह के सामने से संतरा
सीने के अन्दर महसूस कर रहा था मैं
जैसे कलेजे पर धक्का देती हुई,
एक लाल रंग में रंगी हुई नदी रुक गई थी।
दरख्तों के सामने कांपता हुआ
लटक रहा था
उस शाम जलकर राख होती हुई आत्मग्लानि।
वो शुक्रवार था या रविवार
दर्पणों में प्रतिध्वनित हो रही थी
टूटे हुए तारों की चीखें

 

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