वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ ॥
कटि कुटि करि खु्मबि चड़ाइआ ॥
लोहा वढे दरजी पाड़े सूई धागा सीवै ॥
इउ पति पाटी सिफती सीपै नानक जीवत जीवै ॥
होइ पुराणा कपड़ु पाटै सूई धागा गंढै ॥
माहु पखु किहु चलै नाही घड़ी मुहतु किछु हंढै ॥
सचु पुराणा होवै नाही सीता कदे न पाटै ॥
नानक साहिबु सचो सचा तिचरु जापी जापै ॥१॥(956)॥

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