वुसअते-बेकराँ में खो जायें -कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

वुसअते-बेकराँ में खो जायें -कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

 

वुसअते-बेकराँ में खो जायें
आसमानों के राज़ हो जायें

क्या अजब तेरे चंद तर दामन
सबके दागे-गुनाह धो जायें

शादो-नाशाद हर तरह के हैं लोग
किस पे हँस जायें,किस पे रो जायें

यूँ ही रुसवाईयों का नाम उछले
इश्क़ में आबरू डुबो जायें

ज़िन्दगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त!
सोच लें और उदास हो जायें

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