विषमता-देखना एक दिन-नरेश मेहता-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Naresh Mehta

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तुम्हारे फेरते ही
आँख
सबने फेर ली है
आँख–
मेरे इस एकान्त ने भी।

 

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