विश्वास मत छीनो-कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu 

विश्वास मत छीनो-कविता -स्वागता बसु -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Swagata Basu

विश्वास मेरा मत छीनो कान्हा
यह मेरे जीवन की रेखा है
जब जब हृदय में साँझ ढली है
सूरज को उगते देखा है

विश्वास अडिग है आओगे तुम
अधरों पर अमित मुस्कान लिये
व्यथा का चिर मौन हरण कर
हृदय में प्रीति सम्मान लिए
कान्हा, मैं मीरा हूँ तेरी
इस प्रेम को किसने रोका है
जब जब हृदय में साँझ ढली है
सूरज को उगते देखा है

हर विवश अश्रु की धारा
मुझसे प्रतिपल यह कहती है
जगति के उस पर सजन रे
प्रीत की गंगा बहती है
नैनो के क्षितिज पर मिल न सको तो
हृदय भी एक झरोखा है
विश्वास मेरा मत छीनो कान्हा
यह मेरे जीवन की रेखा है

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