विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

विरहणी थकी नींद तो चाहती है
अभी और कुछ देर ठहरे अंधेरा,
मगर ज्वाल-जोगी दिये की लगन है
कि हो आज पहले सुबह से सबेरा,

इसी द्वन्दद्व में मैं पड़ा सोचता हूँ
कि सूरज उगाऊँ कि चन्दा बुलाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

सिसक साँस कहती यही रोज मुझसे
कि मिट्टी मिटाए मुझे जा रही है,
मगर देखता हूँ उधर बाग़ में तो
कली धूल में खिल रही, गा रही है,

दुरंगे नगर की दुरंगी डगर पर
कहाँ बैठ रोऊँ, वहाँ बैठ गाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

जनम से मरण की शिकायत यही है
“कि जीवन नहीं मानता हुक्म मेरा,”
कफ़न ने सदा ही कहा किंतु रोकर
“कि है सौत पे बस न मेरा न तेरा,”
सृजन-नाश के दो क्षणों से बँधा मैं
जनम पर हँसूँ या मरण पर रिझाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

बसा मृत्तिका-पुतलियों में सपन जो
छुआ धूप ने तो किरण बन गया वह
लिया चूम जो चाँद ने भूल से तो
गिरा आंख से ओस कन बन गया वह,
तुम्हीं फिर कहो स्वप्न के द्वार पर मैं
अँगारे बिछाऊँ कि तारे टंकाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

सुबह धुप का रूप घूँघट सजाए
जहाँ देखता था लगा फूल-मेला,
वहीं शाम अब ओढ़ चादर धुएँ की
पड़ा रो रहा एक पतझर अकेला,
‘सुबह-शाम बन ढल रही ज़िन्दगी को’
कि रोकर सुलाऊँ, कि हँसकर जाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

उषा जो सुबह हाथ मेंहदी रचाती
उसे पोंछ देता सदा सान्ध्य-तारा,
लगाती निशा भाल जो चन्द्र-टीका
उसे चाट जाता दिवस का अँगारा,
इसी भाँति मैं भी स्वयं मिट रहा जब
किसे फिर बनाऊँ, किसे फिर मिटाऊँ ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

किसी एक तूफ़ान वाली लहर ने
दिया था मुझे फेंक कल इस किनारे,
लहर पर वही अब बिना कुछ बताए
लिये जा रही है मुझे उस किनारे,
समय-सिन्धु में एक तृण हूँ पता क्या
कहाँ डूब जाऊँ, कहाँ पार पाऊँ?
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है,
किसे याद कर लूँ, किसे भूल जाऊँ ?

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