विज्ञान और आज की बेटियाँ-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

विज्ञान और आज की बेटियाँ-के.एम. रेनू-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita K. M. Renu

 

तकनीकी और विज्ञान की दुनियाँ ने
हमें इस कदर आगे बढ़ाया
कि
मेरा कल जो आया
मेरे देश की बेटियाँ ही सुलाया
अब तलक जिसकी रौनक से
प्रकाश था छाया
कल वहीं घना अंधकार लेकर आया
उसका हत्यारा हमें बनाया
हमने स्वार्थ के मद में
अपनी हर इंसानियत
खुद ही गँवाया
पीढ़ियों को मैंने
सबसे तोड़वाया
उसकी आत्मा से नहीं
अपने भीतर के जानवरों को
मैंने स्वयं ही जगाया
हर सड़क चौराहे पर
उसका बलात्कार करवाया
हबस को अपनी
आधुनिकता बताया
सोया हुआ हर व्यक्ति के भीतर
की आग उसने ही जलाया
उसके हर अंगों को एक निर्जिव
वस्तु समझकर खेलता ऱह गया
अपनी ताकत के बल से
उसकी गर्दन घूमाता रह गया
उसकी रसना पर
चाकू की धार अजमाता रह गया
कटकर अलग हो गयी
मेरे देश की वो सुन्दर बेटियाँ
जिस माँ की गोंद खाली कराया
उसके आँगन की रोशनी
तुमने ही बुझाया
मेरे देश के भविष्य में
संकट जो लाया
ऐसा विज्ञान तू क्यों है आया ?

 

Leave a Reply