विजयिनी विजया-छप्पै -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

विजयिनी विजया-छप्पै -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

कलह-फूट को तजे, बैर का बीज न बोवे।
जपे मेल का मंत्र, मलिनता मन की खोवे।
बंधु-प्रीति में बँधे, बने निजता का नेमी।
निज भाषा, निज देश-वेश का होवे प्रेमी।
पाकर सजीवता-जय-करी हित-वितान जग में तने।
जन जाति सकल अविवेक पर विजया बल विजयी बने।

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