विचि चकी आपि पीसाईऐ-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

विचि चकी आपि पीसाईऐ-पंजाबी काफ़ियाँ शाह शरफ़-शाह शरफ़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shah Sharaf

विचि चकी आपि पीसाईऐ,
विच रंगन पाय रंगाईऐ,
होइ कपड़ काछि कछाईऐ,
ता सहु दे अंग समाईऐ ।१।

इउं प्रेम प्याला पीवणा,
जगि अन्दरि मरि मरि जीवना ।१।रहाउ।

विचि आवी आपि पकाईऐ,
होइ रूंयी आपि तूम्बाईऐ,
विचि घानी आपि पीड़ाईऐ,
तां दीपक जोति जगाईऐ ।२।

विचि आरनि आपि तपाईऐ,
सिरि घणियर मारि सहाईऐ,
करि सिकल सवार बनाईऐ,
तां आपा आपि दिखाईऐ ।३।

होइ छेली आपि कुहाईऐ,
कटि बिरख रबाब बजाईऐ,
शेख़ शरफ़ सरोद सुणाईऐ ।४।
(राग धनासरी)

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