वा मेरे वतन-नाज़िम हिकमत रन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazim Hikmet Ran(अनुवाद : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़) 

वा मेरे वतन-नाज़िम हिकमत रन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazim Hikmet Ran(अनुवाद : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़)

ओ मेरे वतन, ओ मेरे वतन, ओ मेरे वतन
मेरे सर पर वो टोपी न रही
जो तेरे देस से लाया था
पांवों में अब वो जूते भी नहीं
वाकिफ़ थे जो तेरी राहों से
मेरा आख़िरी कुर्ता चाक हुआ
तेरे शहर में जो सिलवाया था

अब तेरी झलक
बस उड़ती हुई रंगत है मेरे बालों की
या झुररीयां मेरे माथे पर
या मेरा टूटा हुआ दिल है
वा मेरे वतन, वा मेरे वतन, वा मेरे वतन

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